Varnamala in hindi – संपूर्ण हिंदी वर्णमाला जानकारी

Hindi Varnamla – संपूर्ण हिंदी वर्णमाला जानकारी

In these article you will get to know about hindi varnamala

hindi varnamala | swar aur vyanjan

 वर्णमाला का परिचय

व्याकरण की परिभाषा :

किसी भी भाषा को उचित रूप से जानने और सीखने के लिए उसके व्याकरण का ज्ञान होजरूरी है। व्याकरण उस विद्या या विषय को कहते हैं, जिससे भाषा के शुद्ध रूप, प्रयोग और उच्चारण के नियमों का ज्ञान होत
है।

व्याकरण के विभाग ; व्याकरण के निम्नलिखित तीन विभाग होते हैं :

(क) वर्ण विभाग (ख) शब्द विभाग (ग) वाक्य विभाग।

((क) वर्ण विभाग : वर्ण अक्षर को कहते हैं। वर्ण या अक्षर उस ध्वनि को कहते हैं, जिनके टुकड़े नहीं हो सकते । जैसे
अ,क, च आदि। किसी एक अक्षर या वर्ण का कोई अर्थ नहीं होता। जैसे – कि + ता + ब में किसी एक अक्षर का कोई अर्थ नष्ट
निकलता।

अक्षरों या वर्गों के समूह को वर्णमाला कहते हैं।

वर्ण के दो भेद होते हैं:- swar aur vyanjan

Varnamala in hindi

(१) स्वर (Vowels)

जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से किया जा सकता है, उन्हें स्वर कहते हैं। हिंदी में ११ स्व
हूँ अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ अं को अनुस्वार और अ: को विसर्ग कहते हैं। इनके साथ हिंदी वर्णमाला में १:
स्वर होते हैं।

(२) व्यंजन (Consonants)

(जिन वर्णो का उच्चारण स्वरों की सहायता के बिना नहीं हो सकता, उन्हे व्यंजन कहते
हैं। हिंदी वर्णमाला में ३३ व्यंजन हैं ,
क, ख, ग, घ, ङ। च, छ, ज, झ, ञ। ट, ठ, ड, (ड), ढ, (ढ), ण। त, थ, द, ध, न। प, फ, ब, भ, म । य, र, ल,
व। श, ष, स, ह । ळ, क्ष, त्र, ज्ञ, श्र।
(इसके अलावा संयुक्त व्यंजन भी होते हैं : क्ष, त्र, ज्ञ और श्र को स्वतंत्र व्यंजन नहीं माना जाता यह प्रत्येक व्यंजन दो
अलग-अलग व्यंजनों के मेल से बना हैं। जिसे ‘क् + अ = क्ष, त् + र = त्र, ज्+ ञ = ज्ञ, श + २ = श्र। इसीलिए इन व्यंजनों को
संयुक्त अक्षर कहते हैं। हिंदी भाषा में ड़ और ढ़ वर्गों का भी बहुत प्रयोग होता है। ये वर्ण ड और ढ के नीचे बिंदी (नुक्ता) लगाने
से बनते हैं।

Varnamala in hindi - संपूर्ण हिंदी वर्णमाला जानकारी
Varnamala in hindi – संपूर्ण हिंदी वर्णमाला जानकारी

वर्णों का उच्चारण (मुख के जिस स्थान से वर्णों का उच्चारण होता है, वही वर्ण का उच्चारण स्थान भी माना जाता है। कुल
उच्चारण स्थान छः हैं।

(१) कंठ (२) तालू (३) मूर्धा (४) दन्त (५) ओष्ठ (६) नासिका।

(१) कंठ्य : कंठ से जिन वर्णों का उच्चारण होता है

(२) तालव्य : तालू से जिनका उच्चारण होता है –
अ, आ, क – वर्ग (क, ख, ग, घ)
इ, ई, च – वर्ग (च, छ, ज, झ) य, श।

(३) मूर्धन्य : (कठोर तालु) से जिनका उच्चारण होता है।

(४) दन्त्य : दाँत से जिनका उच्चारण होता है –
ऋ, ट – वर्ग (ट, ठ, ड, ढ) र, ष।
लु, त – वर्ग (त, थ, द, ध, ल, स)

(५) ओष्ठ्य : ओठ से जिनका उच्चारण होता है।

(६) नासिका : अनुनासिक : नाक से जिनका उच्चारण होता है।
उ, ऊ, प – वर्ग (प, फ, ब, भ)।
ङ, ञ, ण, न, म।

(७) कंठ-तालव्य : कंठ और तालू दोनों से जिनका उच्चारण होता है – ए,ऐ।’

(८) दंतोष्ठ्य : दाँत और ओठों से जिनका उच्चारण होता है – व

स्वर और व्यंजन के उदाहरण

प्रश्न १. नीचे दिए हुए वर्षों में से स्वर अलग कीजिए :
(ए, न, ऋ, क, ट.
प्रश्न २. नीचे दिए हुए वर्षों में से व्यंजन अलग कीजिए :
ओ, पाऊस, द, अ, ऊ, ख)
प्रश्न ३. नीचे दिए वर्गों में से संयुक्ताक्षर अलग कीजिए :
छ, अ, इ, (ज, थ, ण, श, ३, झ।
प्रश्न ४. खाली जगहों में ड या ढ़ व्यंजन लिखिए :
(१) प ड ना (२) ल 5ना। (३) क 5 क। (४) उड़ना।
प्रश्न ५. वर्गों के ऊपर और नीचे लगनेवाली बिंदी का क्या महत्त्व है ?
प्रश्न ६. नीचे लिखे अक्षरों का उच्चारण स्थान बताइए :
क, ज, ट, छ, ढ, ब, न, प, ओ, व, ङ, थ।

(इस अध्याय में वर्णों का और भी परिचय दिया गया है।

(१) अनुस्वार : वह बिंदी जो अक्षर पर लगाई जाए, उसे अनुस्वार कहते हैं।
जैसे – पतंग, हिंदी, जंगल, उमंग, सुंदर आदि।)

(२) चंद्र बिंदु : अक्षर पर जहाँ आधा चाँद और बिंदु का प्रयोग होता है, उसे चंद्र बिंदु कहा जाता है। इसका रूप इस
प्रकार का होता है: (*) जैसे – पाँच, गाँधी, आँख, चाँद, छलाँग आदि।

(३) विसर्ग : किसी शब्द के आगे जब दो बिंदियों (:) का प्रयोग किया जाता है, तो उसे विसर्ग कहा जाता है। इसका
उच्चारण ह की तरह होता है। जैसे – प्राय: (प्रायह्), प्रात:काल (प्रातकाल), क्रमश: (क्रमशह), अंत:करण (अंतकरण)
आदि।

(४)(संयुक्ताक्षर : जब किसी व्यंजन का स्वर हटाकर उसे आगे वाले व्यंजन से जोड़ दिया जाता है, तो संयुक्ताक्षर
बनता है। जैसे – र् + ष = र्ष (हर्ष), द् + र (द्र) = समुद्र, च् + छ = च्छ (अच्छा), क् + ख = क्ख (मक्खन)।

(५) नुक्ता : अरबी और फारसी शब्दों के उच्चारण की शुद्धता के लिए कुछ अक्षरों (क, फ, ज, ख, ग) के नीचे बिंदी
लगाई जाती है। इसे नुक्ता कहते हैं। ऐसे शब्दों के उच्चारण के समय गले पर जोर दिया जाता है। जैसे – आज़ाद, कीमत, गज़ल
कलम आदि।)

(६) विवृत ऑ-चंद्राकार या अर्धचंद्र : हिंदी में अंग्रेजी भाषा के कई शब्दों का प्रयोग किया जाता हैं। इन शब्दों के
सही और शुद्ध उच्चारण के लिए अक्षर पर अर्धचंद्र () का चिह्न लगाया जाता है। इसे विवृत कहते हैं। अंग्रेजी शब्द के
उच्चारण में ‘आ’ या ‘ओ’ बीच का उच्चारण इसके लगाने से शुद्ध रूप में बोला जा सकता है। जैसे – बॉल, बॉक्स, डॉक्टर,
ऑफिस, चॉक, हॉकी, ऑक्सिजन आदि।

 उदाहरण

प्रश्न १. योग्य वर्ण पर अनुस्वार लगाइए :
बंदूक, सुंदर, मंगल, शंकर, पतंग, अंगूर, सतरंगा,बगाल, जग, बंदर, जयंती।
प्रश्न २. उचित वर्ण पर चंद्र बिंदु लगाइए।
मुंह, गांधी, पाँच, जहा, हसना, गाव, आंख, मांगना, चाद।
प्रश्न ३. उचित वर्ण के आगे विसर्ग लगाइए :
प्रातकाल,प्रायः नमः क्रमशन
प्रश्न ४. नीचे दिए हुए शब्दों को शुद्ध करके लिखिए :
चाँद, ऑधी, गोलिया, मुशीराम, तिरंगा, गंगा।
प्रश्न ५. जहाँ आवश्यक हो,वहाँ वर्ण में नुक्ता लगाइए।
पढाई, गाडी, लडका, गुडिया, आजाद, लडाई।

(ख) शब्द विभाग :

अक्षरों का वह समूह जिससे कोई अर्थ निकले, उसे शब्द कहते हैं।
जैसे – राम, कमल, लड़का, नदी।

(ग) वाक्य विभाग :

शब्दों के समूह से वाक्य बनते हैं। जिस शब्द समूह से एक पूर्ण अर्थ व्यक्त हो, उसे वाक्य कहते
हैं। जैसे – (१) हमारे देश का नाम भारत है। (२) लड़के मैदान में खेल रहे हैं। (३) आज का दिन बड़ा ही शुभ है।

पद :

वाक्य में प्रयुक्त शब्दों को पद कहते हैं। जैसे – (१) बाग में सुंदर फूल हैं। इस वाक्य में – (१) बाग में
(२) सुंदर (३) फूल (४) हैं। ये सभी शब्द पद है।

पद के निम्नलिखित प्रकार है:
(१) संज्ञा

(२) सर्वनाम

(३) विशेषण

(४) क्रिया

(५) अव्यय।

उदाहरण

प्रश्न १. नीचे दिए हुए वर्ण समूहों में से सार्थक (अर्थ बतानेवाले) शब्दों को अलग कीजिए :
मलक, किताब, रझना, तितली, रटम, अंगूर, फसीताल, बगीचा, दरबं ।
प्रश्न २. नीचे दिए हुए शब्दों को सही क्रम में रखकर वाक्य बनाइए :
(१) जा तू चला से यहाँ । (२) बात मत मेरी मानो। (३) है भाई मेरा राम। (४) तोड़ना मत बगीचे में फूल। (५) का बड़ों
करो आदर।

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