Sher aur lomdi ki kahani-बोलती गुफा||lomdi aur sher ki kahani

Sher aur lomdi ki kahani-बोलती गुफा||lomdi aur sher ki kahani

Aaj hum apke liye laye hai Sher aur lomdi ki kahani in hindi jo apko behad pasand ayegi.Iss kahani mei ek sher hai jo ki bhaut bhuka rehta hai aur ek lomdi hai jo bhaut chatur hai. Sher vishal aur takatwar hone par bhi lomdi se chalak nhh.. Lomdi sher ko bhaut chalaki se budhuu banati hai..Sher aur lomdi puri hindi story niche hai.

बोलती गुफा-Sher aur lomdi kahani

      एक बार की बात है.एक शेर जंगल में घूमते घूमते थक गया. पर उसे एक भी शिकार नहीं मिला. अंत में वह बहुत थक गया. धीरे-धीरे शाम हो गई.पर उसे कोई शिकार नहीं मिला.शेर ने गहरी सांस ली और सोचा,“आज खाली पेठ सोना पड़ेगा.”
इतने में ही शेर उस जगह से निकल गया. थोड़ी दूर जाने पर शेर को एक गुफा नजर आई. शेर के मन में विचार आया,“क्यों ना मैं यह गुफा भी देख लूँ.”

शेर गुफा में घुसा पर उससे कोई नजर नहीं आया. कोई शिकार अंदर ना पाकर शेर निराश हो गया. उसने गहरी सांस छोड़ी. तभी उसके मन में एक विचार आया. अभी शाम होने वाली है. इस गुफा में जो भी जानवर रहता होगा वह इस गुफा में जरूर वापस आएगा. वह वही चुप कर बैठ गया.

शेर चुपचाप गुफा के भीतर बैठा रहा और शिकार के आने की राह देखने लगा.

जिस गुफा मैं शेर इंतजार कर रहा था. वहां गुफा लोमड़ी की थी. लोमड़ी बहुत चतुर जानवर होता है.शाम होते ही सियार गुफा की ओर आने लगा. तभी अचानक उसे शेर के पंजों के निशान वहां दिखाई दिए.लोमड़ी ने देखा,“शेर के पंजों के निशान केवल अंदर की ओर जा रहे हैं, पर गुफा से बाहर आने वाले पंजों के निशान कहां.”

लोमड़ी समझ गया, अवश्य शेर गुफा के अंदर बैठा मेरा इंतजार कर रहा होगा. उसने मन ही मन सोचा,‘अच्छा हुआ कि मैं सूरज ढलने से पहले ही गुफा की ओर चला आया.’

लोमड़ी ने कुछ देर सोचा.परंतु लोमड़ी के पास दूसरा कोई उपाय भी नहीं था. उसका गुफा में जाना तो जरूरी था. लोमड़ी ने यह भी सोचा कि यदि वह खुले जंगल में सोए तो उसे कोई दूसरे जानवर भी हानि पहुंचा सकते हैं.

फिर पूछ हिलाकर लोमड़ी बोला,“गुफा, अरी ओ गुफा…”
कुछ देर लोमड़ी चुप रहा. वह फिर बोला,“गुफा,अरी गुफा…. आज तू बोलती क्यों नहीं आज तू बोलती क्यों नहीं? हमेशा जब मैं कहता,“गुफा अरी गुफा…” तो तू कहती थी,“ आ जा रे आ जा! कैसा हुआ आज का दिन?”

गुफा के अंदर बैठा शेर सोच रहा था कि,शायद रोज यह गुफा लोमड़ी के आने पर ऐसा ही बोलती होगी. शायद आज यह मुझ से डर रही होगी. इसीलिए यह बोल नहीं पा रही. क्यों ना गुफा के बदले में ही जवाब दे दूँ?
लोमड़ी ने थोड़ी देर और इंतजार किया और फिर कहां,“गुफा अरी गुफा…” तभी अंदर छुपा शेर कम स्वर में बोल पड़ा,“ आ जा रे आ जा कैसा हुआ आज का दिन?”
शेर ने जैसा ही ऐसा बोला, उसकी आवाज धीमी हो पर फिर भी उसकी आवाज गुफा में गूंज उठी.आसपास के सभी जानवर सचेत हो गए.

शेर सोचता रहा कि आप लोमड़ी गुफा के अंदर आएगा. परंतु लोमड़ी की जगह लोमड़ी की आवाज आई,“क्या शेर महाराज, गुफा भी कभी बोलती है?

अच्छा महाराज अब मैं चलता हूं. यह बोलकर लोमड़ी वहां से तेजी से भागा और शेर देखता ही रह गए. Hindiforu

 

 

 

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