Sacha dost-stories in hindi Full Hindi kahani

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Sacha dost 

एक गांव में रमेश नामक लड़का रहता था.वह अपनी मां के साथ एक छोटी सी कुटिया में रहता था.अचानक एक जरूरी काम आने से उसे पास के गांव में जाना था.परंतु उस गांव में जाने का जो रास्ता था. उस जंगल में काफी खतरनाक जानवर रहते थे.इसलिए रमेश उस जंगल से जाने में कतरा रहा था. पर काम भी बेहद जरूरी था.इसीलिए रमेश की मां ने सुझाव दिया कि बेटा अकेले ना जाकर किसी मित्र को साथ ले जाओ.

रमेश का बेहद करीबी दोस्त था सुरेश.उसने सुरेश से कहा,”सुरेश मुझे जंगल के पास एक गांव में काम है क्या तू मेरे साथ चलेगा”.सुरेश ने तुरंत रमेश की बात पर हामी भरी और चलने को राजी हो गया.

रमेश और सुरेश वादे के मुताबिक दोनों साथ जंगल की ओर निकल पड़े.अपने गांव से निकलते ही उन्हें खेत पार करना था,जिसके बाद ही जंगल का सफर शुरू होता था.
दोनों मित्र बात करते-करते जंगल का रास्ता तय ही कर रहे थे कि अचानक से सुरेश चौक पड़ा जैसे क्यों उसने कोई भयानक जानवर देख लिया हो.वह दौड़ कर एक पेड़ पर चढ़ गया. रमेश अपने मित्रों को पेड़ पर चढ़ता देख हक्का-बक्का रह गया.वह सोच में पड़ गया कि सुरेश अचानक पेड़ पर क्यों चड गया?

तभी रमेश ने अचानक से देखा कि सामने से एक विशाल भालू उनकी और बड़ा चला आ रहा है.वह समझ गया कि भालू को देखकर उसका सच्चा दोस्त सुरेश उसे इस दुविधा में छोड़ कर अपने आप को बचाने के लिए पेड़ पर चढ़ गया! सुरेश ने ना रमेश को सतर्क किया ना उसे बचाने की कोशिश की. अब रमेश सोच में पड़ गया कि वह क्या करें?

रमेश कि सतिथि ऐसी हो गई कि ना उसके पास भागने का समय था ना पेड़ पर चढ़ने का.उसने झटपट सोचा और सांस रोककर जमीन पर लेट गया.धीरे-धीरे भालू रमेश की ओर आगे बढ़ा.

भालू ने रमेश के चारों तरफ घूम कर उसे सूँघा और उसके मुंह के पास जाकर खड़ा हो गया.रमेश डर रहा था पर वह सांस रोककर मुर्दे की तरह पढ़ा रहा.उसकी यह तरकीब काम कर गई और भालू उसे मुर्दा समझ कर आगे बढ़ गया.रमेश ने आंखें मुंदी हुई थी, इसीलिए उसे कुछ दिख नहीं रहा था.परंतु उसने भालू के पैरों की आवाज सुनी,जो आवाज धीमी होती गई.

रमेश ने धीरे-धीरे अपनी आंखें खोली.उसने देखा,भालू और उसके पास नहीं है वह उससे दूर चला गया है.वह उठकर खड़ा हो गया. रमेश को खड़ा होते देख सुरेश पेड़ से नीचे उतर आया और रमेश के पास आकर हंसने लगा और पूछने लगा,”अरे मित्रा वह भालू तुम्हारे कान में क्या कह रहा था?”

रमेश ने तुरंत जवाब दिया,”मित्र भालू मेरे कान में यही कह रहा था,जो मित्रा संकट में साथ ना दे और कठिन परिस्थितियों में तुम्हें अकेला छोड़ भाग जाए, उसे कभी अपना मित्रा समझने की भूल ना करना.

Humari vishes kahaniyo ki succhi niche pradarshit hai…..

1.Gadhe ki kahani

2.Sacha dost ki kahani 

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