ऋग्वेद क्या है- Ved prakar Rigveda || ऋग्वेद हिंदी में

ऋग्वेद क्या है- Ved prakar Rigveda

Rigved humare sanatan dharm bhaut mahatvapurna ved hai. Chaliyeh aaj hum ved ke ussi prakar ko vistaar roop se jaan lete hai aur samaj lete hai. Aaj ke iss post se aap jaan payege ki ved ke prakar ऋग्वेद सनातन धर्म अथवा हिन्दू धर्म का स्रोत है । ka kya matlab hota hai, Yeh kiss kary ke liye istamal kiya jata hai etyadi sabhi jankari. Hum hindiforu.in ki team aap ke liye aise hi aur jankari dena wali article lateh rehte hai jarur visit kare SITE

ऋग्वेद

ऋग्वेद सनातन धर्म अथवा हिन्दू धर्म का स्रोत है । इसमें १०२८ सूक्त हैं, जिनमें देवताओं की स्तुति की गयी है । इसमें देवताओं का यज्ञ में आह्वान करने के लिये मन्त्र हैं, यही सर्वप्रथम वेद है। ऋग्वेद को इतिहासकार हिन्द-यूरोपीय भाषा-परिवार की अभी तक उपलब्ध पहली रचनाऔं में एक मानते हैं । यह संसार के सर्वप्रथम ग्रन्थों में से एक है। ऋक् संहिता में १० मंडल, बालखिल्य सहित १०२८ सूक्त हैं।

जानिए Ved kitne prakar ke hote hain 

Ved in hindi – वेद क्या है  

वेद मंत्रों के समूह को सूक्त कहा जाता है, जिसमें एकदैवत्व तथा एकार्थ का ही प्रतिपादन रहता है। कात्यायन प्रभति ऋषियों की अनुक्रमणी के अनुसार ऋचाओं की संख्या १०,५८०, शब्दों की संख्या १५३५२६ तथा शौनक कृत अनुक्रमणी के अनुसार ४,३२,००० अक्षर हैं। ऋग्वेद की जिन २१ शाखाओं का वर्णन मिलता है, उनमें से चरणव्युह ग्रंथ के अनुसार पाँच ही प्रमुख हैं- १. शाकल, २. वाष्कल, ३. आश्वलायन, ४. शांखायन और माण्डूकायन ।

Agni puran in hindi-सम्पूर्ण अग्निपुराण || Agni purana

ऋग्वेद में ऋचाओं का बाहुल्य होने के कारण इसे ज्ञान का वेद कहा जाता है। ऋग्वेद में ही मृत्युनिवारक त्र्यम्बक-मंत्र या मृत्युञ्जय मन्त्र (७/५९/१२) वर्णित है, ऋग्विधान के अनुसार इस मंत्र के जप के साथ विधिवत व्रत तथा हवन करने से दीर्घ आयु प्राप्त होती है तथा मृत्यु दूर हो कर सब प्रकार का सुख प्राप्त होता है। विश्वविख्यात गायत्री मन्त्र (ऋ० ३/६२/१०) भी इसी में वर्णित है।

ऋग्वेद में अनेक प्रकार के लोकोपयोगी-सूक्त, तत्त्वज्ञान-सूक्त, संस्कार-सुक्त उदाहरणतः रोग निवारक-सूक्त (ऋ०१०/१३७/१-७),श्री सूक्त या लक्ष्मी सुक्त (ऋग्वेद के परिशिष्ट सूक्त के खिलसूक्त में), तत्त्वज्ञान के नासदीय-सूक्त (ऋ० १०/१२९/१-७) तथा हिरण्यगर्भ-सूक्त (ऋ०१०/१२१/१-१०) और विवाह आदि के सूक्त (ऋ० १०/८५/१-४७) वर्णित हैं, जिनमें ज्ञान विज्ञान का चरमोत्कर्ष दिखलाई देता है। ऋग्वेद के विषय में कुछ प्रमुख बातें निम्नलिखित है-
यह सबसे प्राचीनतम वेद माना जाता है।

ॠग्वेद के कई सूक्तों में विभिन्न वैदिक देवताओं की स्तुति करने वाले मंत्र हैं। यद्यपि ॠग्वेद में अन्य प्रकार के सूक्त भी हैं, परन्तु देवताओं की स्तुति करने वाले स्तोत्रों की प्रधानता है।ॠग्वेद में कुल दस मण्डल हैं और उनमें १०२८ सूक्त हैं और कुल १०,५८० ॠचाएँ हैं।ॠग्वेद के दस मण्डलों में कुछ मण्डल छोटे हैं और कुछ मण्डल बड़े हैं।

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