majedar kahaniya in hindi-चार मूर्ख Majedar kahani

Majedar kahaniya in hindi-चार मूर्ख Majedar kahani

Majedar kahaniya in hindi-maje ke liye kahani dhund rahe hai yadi dhund rahe hai toh mibarak ho aap bilkul sahi jaga hai. Aaj ki kahani hai maje se bhari चार मूर्ख ki jo apko anandit kardegi…..HINDIFORU humesa apke sath.

चार मूर्ख

एक बार एक राजा नरेश ने अपने मंत्री को आदेश दिया। तुम जाओ और 3 दिन के अंतर मेरे लिए चार मूर्ख ढूंढ कर लाओ यदि तुम ऐसा नहीं कर पाए तो तुम्हें अपनी जान से हाथ धोना पड़ेगा।

राजाजी की बात सुनकर मंत्री घबरा से गए।

अब मरता क्या न करता। राजा ने आदेश जो फरमाया था।
मंत्री ने ईश्वर को शरण किया और मूर्ख की तलाश में निकल पड़ा। कुछ ही दूर चलने के बाद मंत्री ने एक आदमी को देखा जो गठरी सर पर लिए गधे पर बैठा था। इस प्रकार मंत्री को पहला मूर्ख मिल गया। मंत्री ने चैन की सांस ली और फिर मूर्ख ढूंढने निकल पड़ा।

थोड़ी दूर और चलने पर मंत्री को फिर एक मूर्ख नजर आया। वह मूर्ख लोगों को मिठाई बांट रहा था।मंत्री के पूछने पर उस मूर्ख ने कहा कि मेरी पत्नी मेरे शत्रु के साथ भाग गई है और आज उनका एक बेटा हुआ है। यही खुशी से मैं लड्डू बांट रहा हूं।

दोनों मूर्खों को लेकर मंत्री राजा के पास चले गए।

राजा ने दो मूर्ख को देखकर पूछा कि तीसरा मूर्ख कहां है?

इस पर मंत्री ने बड़ी सरलता से कहा महाराज वह तीसरा मूर्ख मैं हूं। जो बिना कुछ सोचे समझे मूर्खों की तलाश में निकल पड़ा। बिना कुछ सोचे समझे हुकुम का पालन करने चला गया।

इस पर राजा मुस्कुराए और पूछने लगे कि चौथा मूर्ख फिर कौन है?

मंत्री ने कहा-क्षमा करें महाराज वह चौथे मूर्ख तो आप है। जनता की भलाई ना सोच कर मूर्खों को ढूंढने की आज्ञा देना भी एक मूर्खता है।

ऐसा कहकर मंत्री ने अपना शीश नवा दिया। राजा को मंत्री की बात बहुत पसंद आई। राजा ने मंत्री को बहुमूल्य रत्नों से सम्मानित किया।
कैसी लगी हमारी यह मजेदार कहानी। कमेंट सेक्शन में हमें जरूर बताएं।

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