Lakadhare ki kahani-लकड़हारे की कुल्हाड़ी वाली कहानी

Lakadhare ki kahani-लकड़हारे की कुल्हाड़ी वाली कहानी

Mera dosto aaj hum apke liye jo kahani laye hai uska title hai Lakadhare ki kahani. Aap mei se kai logo ne yeh kahani jarur kabhi na kabhi padhi hogi ya suni hogi kulhadi ki kahani bachpan mei hume ek majedar kahani lagti thi. Aaj agar aap kulhadi wali kahani ko gaur se padhe toh apko usme ek sikh milagi. Toh kahani ko jarur padhe aur anth mei moral bhi pradarshit kiya hai. Toh chaliye lakadhara aur kulhadi ki kahani padte hai.

लकड़हारे की कुल्हाड़ी

रामू एक गरीब लकड़हारा था। वह अपना गुजर-बसर चलाने के लिए प्रतिदिन जंगल में जाकर लकड़ियां काटता था और शाम को बाजार में जाकर उन्हें बेच आता था।एक दिन रामू पेड़ की तलाश में जंगल में थोड़ा आगे निकल गया। जंगल में अंदर जाते ही उसे नदी किनारे एक बड़ा पेड़ दिखाई दिया। उसने सोचा आज के लिए तो बहुत लकड़िया मिल जाएगी। वह तुरंत कुल्हाड़ी लेकर पेड़ पर चढ़ गया।

रामू ने पेड़ पर चढ़कर केवल दो ही डाल काटे थे कि उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। रामू तुरंत पेड़ से नीचे उतर आया और कुल्हाड़ी ढूंढने लगा। बहुत कोशिश के बाद भी रामू के हाथ कुल्हाड़ी नहीं लगी। रामू बहुत निराश हुआ। उदासी से वह पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया।

इतने में एक जलसे देवी प्रकट हुई। उस देवी ने रामू के उदासी का कारण पूछा। रामू ने देवी को सारी बात बताई। देवी ने रामू को सांत्वना देते हुए कहा। घबराओ मत रामू मैं तुम्हारी कुल्हाड़ी लाकर देती हूं। देवी तुरंत नदी में गई और एक सोने की कुल्हाड़ी लेकर वापस आई। देवी ने रामू से पूछा क्या यह कुल्हाड़ी तुम्हारी है। रामू की कुल्हाड़ी लोहे की टूटी फूटी लकड़ी के हैंडल वाली थी।

उसने सोने की कुल्हाड़ी का लालच ना करते हुए सत्य वचन कहां की यह सोने की कुल्हाड़ी मेरी नहीं है।

फिर से देवी ने नदी में छलांग लगाई और चांदी की कुल्हाड़ी लेकर वापस आई। इस पर भी रामू ने साफ इंकार कर दिया कि यह कुल्हाड़ी भी मेरी नहीं है।

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रामू की बात सुनकर देवी फिर नदी में चली गई और लोहे की कुल्हाड़ी लेकर प्रकट हुई। वह देखकर रामू बोला जी देवी यह मेरी ही कुल्हाड़ी है। रामू की ईमानदारी और सच्चाई देखकर देवी बहुत प्रसन्न हुई। देवी ने रामू को सोने तथा चांदी की कुल्हाड़ी भी भेंट दी। रामूने भी देवी की दी हुई भेंट को स्वीकार किया।

Lakadhare ki kahani-Moral

मित्रों इस कहानी का सार हमें यही सिखाता है।हमेशा ईमानदार रहें। चाहे परिस्थिति कैसी भी तैयार हो ईमानदारी का फल हमेशा अच्छा होता है। इसीलिए लकड़हारे जैसा स्वभाव प्रकट करें चाहे कोई कितनी भी लोभ लालसा दें ईमानदारी का साथ कभी ना छोड़े। इमानदार इंसान हमेशा विश्वास सु पात्र रहते हैं।

Maja aya apko story padh ke kya aap ek story padke hi chale jaoge sayad nhh…Toh apko pareshan hone ki jarurat nhh humne apke liye puri suchii taiyar ki hai jisme apko chuninda kahaniya dikhagi jo apne sayad hi kabhi padhi ho…Agar suchii se hatke kuch padhna chate hai toh visit kare https://hindiforu.in

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