Jadui pari ki kahani – jadui pariyon ki kahaniyan

Pari wali kahani || Pariyo ki kahaniya

Jadui pari ki kahani – मोची और नन्ही परियां

बहुत समय पहले शहर में एक गरीब मोची रहा करता था। उसके घर में केवल उसकी एक पत्नी उसके साथ रहती थी। मोची जूता बनाने में बहुत माहिर था। वह अपने इसी काम से अपने परिवार का गुजारा चलाता था। वह अपनी पत्नी से काफी प्रेम करता था।धीरे-धीरे अन्य मोचियों के मुकाबले उसकी कमाई कम होती गई और वह देखते ही देखते काफी गरीब हो गया था।

पैसों की कमी से तंग आकर मोची ने अपने सभी जूते बनाने के सामानों को बेचने का निर्णय किया। उसने सभी सामानों को नीचे जमीन पर रख दिया। यह सब मोची की पत्नी दूर खड़ी देख रही थी। उसने सामने आकर मोची को समझाया और धैर्य बरतने को कहा। मोची ने अपनी पत्नी की कही हुई बात को समझ लिया और आराम करने चला गया। आराम करते हुए कब उसकी आंख लग गई उसे पता ही नहीं चला।

इतने में ही मोची के घर के किनारे से परिया निकली और मोची की इस अवस्था को देख उन्हें दया आ गई। उन्होंने निश्चय किया कि इस मोची की मदद हमें जरूर करनी चाहिए। उन सभी परियों ने मिलकर मोची के रखे हुए सामान से एक जोड़े जूते बना दिए। सुबह उठते ही मोची ने उन जूतों को देखा और वह बहुत खुश हुआ। उसने उन जूतों को ले जाकर बाजार में बेच दिया और काफी मुनाफा भी कमाया। मोची ने उस मनाफे के पैसे से जूते बनाने के लिए और नए सामान खरीद लिये और वह घर लौट आया।

फिर से उस रात वहीं परिया वापस आई और उन्होंने इस बार बहुत ही सुंदर दिखने वाले चार जोड़ी जूते बना दिए। सुबह उठते ही मोची हैरान परेशान हुआ कि फिर से किसने यह जूता बना दिया। उसने उन जूतों को उठाया और बाजार में जाकर उसने अच्छे दामों में बेच दिया।

कई दिन ऐसे ही बीत गए। एक दिन मोची और उसकी की पत्नी ने निर्णय किया कि इस रात से अब पर्दा उठाया जाए।
उन्होंने रात को दीवाल के किनारे खड़े होकर पहरेदारी या शुरू कर दी जैसे ही परिया आई और उन्होंने जूते बनाना शुरू किया मोची और उसकी पत्नी समझ गई कि ऐसा कौन कर रहा था? उन्होंने परियों को अपने पास बुलाया और धन्यवाद कहां। मोची ने खुशी-खुशी परियों को धन्यवाद कहा और मेहनत करने का वादा किया।

Jadui pari ki kahani – स्नो वाइट सौतेली माँ 

एक समय की बात है एक प्रदेश में एक लड़की थी। वह लड़की मानो दिखने में एक परी से भी सुंदर थी। उसकी सुंदरता पे सब कायल थे। हिमालय पर्वत की बर्फ जैसी गोरी। बालों का रंग काजल सा काला। फोटो की रंगत गुलाब जैसी थी। ओठो का रंग गुलाब जैसे गुलाबी। इसी कारण उसका नाम था स्नो वाइट। परंतु उसकी सौतेली माँ जो खुद को विश्व की सबसे सुंदर औरत समझती थी। वह स्नो वाइट से नफरत करती थी।

स्नो वाइट की सौतेली माँ सुंदर दिखने के साथ ही एक जादूगरनी भी थी। इसी कारण उसे बहुत घमंड था। उसके पास एक आईना था जो जादुई था।
स्नो वाइट की सौतेली माँ रोज आईने से पूछती ए जादुई आईना बता सबसे सुंदर कौन?
इस पर आईना कहता रानी आप!आप सबसे सुंदर हो।

यह सुनकर वह बेहद खुश हो जाती थी।
प्रतिदिन रानी आईने से यही सवाल पूछती और बदले में उसे यही जवाब मिलता। परंतु एक दिन जब रानी ने अपना सवाल दोहराया। आईना बोला- रानी जी सुंदर तो आप है ही परंतु सबसे सुंदर है आपकी बेटी स्नो वाइट।

यह सुनते ही रानी का पारा चढ़ गया। रानी ने तुरंत अपने सैनिकों को बुलाया और स्नो वाइट का सिर कलम कर देने को कहा। सैनिक महारानी की आज्ञा पालन कर स्नो वाइट को दूर जंगल ले गए। वहां सैनिकों को स्नो वाइट का चेहरा देख स्नो वाइट पर दया आ गई।

सैनिकों ने स्नो वाइट को यूंही जंगल में छोड़ दिया। स्नो वाइट पूरे जंगल भर भटकती रही। दूर एक नदी किनारे उसे एक कुटिया नजर आइ जहां कुछ बौने रहा करते थे। स्नो वाइट ने उन्हें अपनी सारी दास्तां बता दी। सारी बात सुन लेने पर बौनो ने कहां यदि आपको अच्छा लगे तो आप यहीं रुक सकती हैं।स्नो वाइट ने उन बौनों की बात मान ली और वहां रूक गई।

दूसरी तरफ जब स्नो वाइट की सौतेली माता ने आईने से वही प्रश्न किया तोआईना बोला- की सबसे सुंदर स्नो वाइट है।स्नो वाइट की सौतेली माता को यकीन नहीं हुआ। उसने अपनी जादुई विद्या से आईने से पूछा की बता स्नो वाइट कहां है? इस पर आईने ने बोला वह बौनों के घर में रह रही है।
रानी तुरंत जंगल की ओर गई और उसने देखा कि सच में स्नो वाइट वहां उन बौनों के साथ रह रही हैं। End of jadui pari ki kahani

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