Gadha ki kahani-aalsi gadha ki kahani

Gadha ki kahani-aalsi gadha ki kahani

आज हम आपके सामने पेश करते हैं … इस कहानी से आपको कुछ सीखने भी मिलेगा और कहानी आपको बेहद मनोरंजक भी करेगी. चलिए कहानी शुरू करते हैं.Iss [Gadha ki kahani] mei ek aalsi gadha rehta hai…. kahani puri padhe.

Gadha ki kahani

                   एक गांव में शंभू नाम का एक नमक व्यापारी था. उसके पास एक गधा था.गधा खुद को बहुत चालाक समझता था.शंभू शहर जाकर नमक की बोरियां बेचा करता था.वह नमक की बोरियां गधे की पीठ पर रखकर शहर ले जाता था. शहर जाने के रास्ते में एक छोटी नदी पड़ती थी.

                  नदी होने के कारण काफी पत्थर नदी में इकट्ठा हो जाते थे कुछ छोटे,तो कुछ बड़े.गधे को उस नदी को पार करके शहर जाना पड़ता था.रोज की तरह शंभू और गधा नमक की बोरी लेकर शहर की ओर निकले.जैसे ही गधा नदी में उतरा तो बड़े पत्थर से टकराने के कारण वह नदी में गिर गया.

                 वह कोशिश करके खड़ा हुआ.खड़े होने पर गधे ने महसूस किया कि वह जो बोझ लेकर चल रहा था वह काफी हल्का हो गया है.भीगने के कारण नमक की बोरियों में से नमक घुल कर पानी में मिल गया और इसी कारण गधे को उसका बोझ हल्का लगने लगा.गधा खुशी से गदगद हो गया.

                 अब तो दररोज गधा ऐसा ही करने लगा.नदी पार करते हुए गधा जानबूझकर पानी मेंगिरने का नाटक करता और बोरियों को भीगा कर उसका वजन कम कर देता.

शंभू कुछ दिनों में ही गधे की चालाकी को समझ गया.उसने गधे को सबक सिखाने के लिए एक उपाय सोचा.अगले दिन शंभू ने नमक की बोरी को बदलकर रुई की बोरी गधे के पीठ पर रख दी.

गधे ने सोचा,यह बोरी का वजन तो अभी से ही कम है. डुबकी लगाने पर भार और कम हो जाएगा.

देखते-देखते नदी आ गई. रोज की तरह गधा नाटक कर कर पानी में गिर पड़ा.धीरे धीरे रुई में पानी घुसने लगा. रूई में पानी घुसने से रूई काफी भारी हो गया.गधा जैसे ही पानी से उठने की कोशिश करने लगा,उसे उसकी पीठ पर बाहर बहुत ज्यादा लगा.गधा सोच में पड़ गया,”कि आज अचानक उसके पीठ पर भला इतना भार कैसे बढ़ गया?”

गधे से चला भी नहीं जा रहा था.गधा वही खड़ा हो गया. शंभू पहले से ही गधे के ऊपर चिड़ा हुआ था.इसी गुस्से के चलते उसने जोर जोर से गधे पर डंडे बरसाए. गधा समझ गया कि उसका मालक उससे भी चालाक है. इसके बाद गधे ने कभी वह गलती फिर से नहीं दोहराई. उसे अपनी चालाकी का फल मिल गया.

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि कभी भी ज्यादा चालाक नहीं होना चाहिए ज्यादा चालाकी हमें ही ले डूबती है.अपने काम को निष्पक्ष और सटीक तरीके से करना और निभाना चाहिए. यदि हम ज्यादा चालाक बनने की कोशिश करते हैं तो हमें उस चीज का फल जरूर मिलता है.
आशा करते हैं, इस कहानी से आपको बहुत कुछ सीखने मिला हो ऐसे ही मजेदार कहानी पढ़ने के लिए और हमसे जुड़ने के लिए विजिट करें हमारी वेबसाइट SITE.

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