Birbal aur akbar ki kahani-Akbar birbal ki story

Birbal aur akbar ki kahani-Akbar birbal ki story

Introduction-Akbar Raja ke kul 9 ratan the unmese ek ratan tha birbal birbal aur badshah akbar ke kisse yuh toh bhed prachalit hai parantu humne sabhi akbar birbal kahani nhh sunni hai isliya hum apke liye laye hai akbar birbal sampoorn kahani isse padhe aur jane birbal ki kahani aur akbar ki kahani.Dono ek dusre se kaise judhe the

नमस्कार मित्रों आपका स्वागत है अकबर बीरबल की कहानी के संग्रह में आज की Akbar-birbal ki kahani है-

 Akbar birbak ki kahani-जीत किसकी

Birbal aur akbar ki kahani-Akbar birbal ki story
Birbal aur akbar ki kahani-Akbar birbal ki story

एक समय की बात है बादशाह अकबर जंग में जाने वाले थे।बादशाह के साथ उनकी फौज भी तैयार थी। बादशाह आगे आगे चल रहे थे और पीछे पीछे उनकी फौज चल रही थी। इन सभी के साथ बीरबल भी जंग के मैदान में जा रहे थे। चलते-चलते अचानक बादशाह को जिज्ञासा हुई और उन्होंने बीरबल से पूछा क्या तुम यह बता सकते हो कि आज जंग कौन जीतेगा?

इस सवाल के जवाब में बीरबल ने महाराज से कहां-“ हुजूर मैं आपके सवाल का जवाब जरूर दूंगा, परंतु जंग के मैदान में पहुंचने के बाद।

कुछ देर बाद बादशाह अकबर की फौज जंग के मैदान में पहुंच गई। मैदान में पहुंचने के तुरंत बाद बीरबल महाराज से बोले-महाराज आपके सवाल का जवाब मैं अभी देता हूं और जवाब यह है की जीत आपकी ही होगी।

इस पर महाराज अचंभित होकर बोले-बीरबल,तुम ऐसा परिणाम कैसे निर्धारित कर सकते हो जबकि दुश्मन की सेना भी कम नहीं।
इस पर बीरबल महाराज को विस्तार से समझाते हुए कहने लगे महाराज दुश्मन की सेना यूं तो गिनती में अनेक है। परंतु उनकी सेना हाथी पर सवार है।और हाथी एक ऐसा जानवर है जो अपनी ही मस्ती में रहता है।जब कि आपकी सेना घोड़े पर सवार है। घोड़ा गाजी मर्द की निशानी है।यह आपको कभी धोखा नहीं देगा।
इतना सुनते ही महाराज ने संख फूंक दिया और जंग का आगाज हो गया।
अंत में परिणाम स्वरूप महाराजा अकबर की ही जीत हुई।

 Akbar birbak ki kahani-जोरू का गुलाम

एक दिन बादशाह अकबर और बीरबल दोनों के बीच मियां-बीवी के रिश्ते की बात चल पड़ी। बातों बातों में बीरबल बोले-अधिकतर मर्द जोरू के गुलाम होते हैं।
बादशाह ने उच्च स्वर में कहा-क्या बात करते हो,यह सब मैं नहीं मानता।
हुजूर में इस चीज को साबित कर सकता हूं-बीरबल बोले
तो साबित करके दिखाओ देर किस बात की-अकबर।
मुझे मंजूर है जहांपनाह आप आज ही एक आदेश जारी कीजिए कि किसी की भी जोरू का गुलाम होने की बात साबित हो जाती है तो वह एक मुर्गा बीरबल को दे आएगा।

बीरबल के कहे अनुसार बादशाह ने हुकुम जारी कर दिया।

देखते-देखते बीरबल के पास ढेरों मुर्गि आ गए। उसने महाराज अकबर से यह आदेश वापस लेने को कहा। परंतु इस पर बादशाह अकबर को बीरबल के साथ मजाक करने की सूझी। महाराजा अकबर ने आदेश को वापस नहीं लिया।
दूसरे ही दिन बादशाह अकबर के दरबार में आकर बीरबल ने अकबर से कहा- महाराज यह बात पता चली है कि पड़ोस के राज्य की कन्या विवाह योग्य हो गई है। आप कहे तो आपका प्रस्ताव भेजा जाए?

इस पर महाराज डर गए और कहने लगे। धीरे बोलो पहले ही जनाना खाने में दो रानियां है।उन्होंने सुन लिया तो मेरी खैर नहीं।
बस महाराज अकबर के ऐसा कहते ही बीरबल महाराज से कहने लगे लाइए महाराज आप भी दो मुर्गी मुझे दे दीजिए।
इस पर महाराज हंस पड़े और उन्होंने अपना आदेश वापस ले लिया।

Akbar birbak ki kahani-कौन गधा तंबाकू खाता है।

अकबर बादशाह तंबाकू का सेवन नहीं करते थे परंतु बीरबल तंबाकू खाते थे। एक दिन महाराज को बीरबल के साथ मजाक करने की सूझी। महाराज जानबूझकर सैर करने का बहाना कर बीरबल को तंबाकू के खेत में ले गए। महाराज ने अपने मजाक के अनुसार एक गधा खेत में छोड़ दिया। जब गधे ने तमाकू को नहीं खाया।तब महाराज झट से बीरबल को बोल पड़े।

“देखो बीरबल तमाकू कितनी बुरी चीज है कि गधा भी तमाकू नहीं खा रहा”।
बीरबल ने भी महाराज के इस वाक्य को दोहराते हुए कहा बिल्कुल सही कहा महाराज आपने गधे कभी तंबाकू का सेवन नहीं करते यह सिर्फ इंसान ही करते हैं।

यह सुनते ही बादशाह शर्म से झुक गए।

Akbar birbak ki kahani-टेढ़ा सवाल

 

एक दिन महाराज अकबर और बीरबल वन में टहल रहे थे। टहलते टहलते महाराज अकबर ने एक टेढे पेड़ को देखा।
पेड़ को टेढ़ा देख महाराज के मन में जिज्ञासा हुई कि यह पेड़ टेढ़ा क्यों है।
महाराज ने यह सवाल बीरबल से किया।बीरबल ने उत्तर दिया-महाराज यह पेड़ इसीलिए टेढ़ा है क्योंकि यह सभी पेड़ों का साला है।
महाराज ने बीरबल से पूछा क्या तुम यह सिद्ध कर सकते हो?
बीरबल ने एक कहावत फरमाते हुए महाराज को उत्तर देने की कोशिश की। इस पर महाराज ने बीरबल से फिर एक प्रश्न किया कि क्या मेरा साला भी टेढ़ा है?
बीरबल ने उत्तर दिया जी जहांपना। उत्तर सुनकर महाराज बोल पड़े फिर मेरे साले को सूली पर चढ़ा दो।बीरबल ने बादशाह के हुकुम अनुसार दूसरे ही दिन फांसी का

बंदोबस्त कर लिया। बीरबल ने तीन फांसी के तख्ते बनाये-एक सोने का एक चांदी का और एक लोहे का।
तीन फांसी के तख्ते देख महाराज ने बीरबल से पूछा यह तीन फांसी के तख्ते किस लिए।
इस पर बीरबल ने उत्तर दिया जहांपनाह सोने के फांसी का तख्ता आपके लिए।चांदी का तख्ता मेरे लिए और लोहे का तख्ता आपके साले साहब के लिए। महाराज आश्चर्यचकित होकर बीरबल की ओर देखने लगे और उन्होंने पूछा तुम्हारे लिए और मेरे लिए क्यों? बीरबल बोले महाराज आप और मैं भी तो किसी के साले हैं।
बीरबल की यह बात सुनकर महाराज जोर जोर से हंसने लगे और उन्होंने अपना दिया हुआ आदेश वापस ले लिया।

Akbar birbal ki kahani in hindi-गधा कौन

Akbar birbal ki kahani in hindi-लकड़ी का टुकड़ा

Kahani akbar birbal hindi-खाने के बाद लेट जा

Akbar birbal ke kisse-जल्दी बुला कर लाओ

Hindi story akbar birbal-akbar birbal ki kahani

Watch More Only on www.Hindiforu.in

akbar birbal kahani akbar birbal ki kahani birbal ki kahani akbar birbal stories in hindi akbar aur birbal ki kahani akbar and birbal stories in hindi birbal ki kahaniya akbar birbal ki kahani in hindi akbar birbal ki story akbar aur birbal ki kahani hindi mai

Leave a Comment