भविष्य पुराण हिंदी में- bhavisya puran in hindi

भविष्य पुराण हिंदी में- bhavisya puran in hindi

Namaskar mitro swagat hai apka Hindiforu.in mei aaj hum apke liye laye hai bhavisya puran yani ki bhavisa se judi hui adhyatmik baate jo humare sanatan dharm mei kae issa purva phele likhi gayi hai. Yeh bhi kuch prachin grantho mei shamil granth hai jo aaj bhi hume humare bhavisya ka gyan karati hai. Sampoorn bhavisya puran jankari niche uplabdh hai padhe aur anth mei comment mei hume jarur bataye ki apko yeh jankari kaisi lagi.Bhavisya purana mei unn sabhi ghatnao ka vivran hai jo itihas mei ghatit hui hai. Yahi sab praman hume bhavisya puran ke prati vishwas jagate hai. Bhavisya puran ki vyakhya ke anusar sabhi prakar ke itihasik tatva tatha hone wale bhavishya ki jankari bhavisya puran mei hai.

भविष्य पुराण इन हिंदी

यह पुराण विषय-वस्तु एवं वर्णन-शैलीकी दृष्टि से अत्यन्त उच्च कोटि का है। इसमें धर्म, सदाचार, नीति, उपदेश, अनेकों आख्यान, व्रत, तीर्थ, दान, ज्योतिष एवं आयुर्वेद शास्त्र के विषयों का अद्भुत संग्रह है। वेताल-विक्रम-संवाद के रूप में कथा-प्रबन्ध इसमें अत्यन्त रमणीय है।

इसके अतिरिक्त इसमें नित्यकर्म, संस्कार, सामुद्रिक लक्षण, शान्ति तथा पौष्टिक कर्म आराधना और अनेक व्रतोंका भी विस्तृत वर्णन है। [1] भविष्य पुराण में भविष्य में होने वाली घटनाओं का वर्णन है। इससे पता चलता है ईसा और मुहम्मद साहब[2] के जन्म से बहुत पहले ही भविष्य पुराण में महर्षि वेद व्यास ने पुराण ग्रंथ लिखते समय मुस्लिम धर्म के उद्भव और विकास तथा ईसा मसीह तथा उनके द्वारा प्रारंभ किए गए ईसाई धर्म के विषय में लिख दिया था।[3]

यह पुराण भारतवर्ष के वर्तमान समस्त आधुनिक इतिहास का आधार है। इसके प्रतिसर्गपर्व के तृतीय तथा चतुर्थ खण्ड में इतिहासकी महत्त्वपूर्ण सामग्री विद्यमान है। इतिहास लेखकोंने प्रायः इसीका आधार लिया है। इसमें मध्यकालीन हर्षवर्धन आदि हिन्दू राजाओं और अलाउद्दीन, मुहम्मद तुगलक, तैमूरलंग, बाबर तथा अकबर आदि का प्रामाणिक इतिहास निरूपित है। इसके मध्यमपर्व में समस्त कर्मकाण्ड का निरूपण है।

भविष्य पुराण हिंदी में- bhavisya puran in hindi
भविष्य पुराण हिंदी में- bhavisya puran in hindi

इसमें वर्णित व्रत और दान से सम्बद्ध विषय भी अत्यन्त महत्त्वपूर्ण हैं। इतने विस्तार से व्रतों का वर्णन न किसी पुराण, धर्मशास्त्रमें मिलता है और न किसी स्वतन्त्र व्रत-संग्रह के ग्रन्थ में। हेमाद्रि, व्रतकल्पद्रुम, व्रतरत्नाकर, व्रतराज आदि परवर्ती व्रत-साहित्य में मुख्यरूप से भविष्यपुराण का ही आश्रय लिया गया है।

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भविष्य पुराण का महत्त्व

सूर्योपासना और उसके महत्त्व का जैसा व्यापक वर्णन ‘भविष्य पुराण’ में प्राप्त होता है। वैसा किसी अन्य पुराण में नहीं उपलब्ध होता। इसलिए इस पुराण को ‘सौर ग्रंथ’ भी कहते हैं। यह ग्रंथ बहुत अधिक प्राचीन नहीं है। इस पुराण में दो हज़ार वर्ष का अत्यन्त सटीक विवरण प्राप्त होता है। ‘भविष्य पुराण’ के अनुसार, इसके श्लोकों की संख्या पचास हज़ार के लगभग होनी चाहिए, परन्तु वर्तमान में कुल अट्ठाईस हज़ार श्लोक ही उपलब्ध हैं।

इस पुराण को चार खण्डों में विभाजित किया गया है- ब्राह्म पर्व, मध्यम पर्व, प्रतिसर्ग पर्व और उत्तर पर्व। ‘भविष्य पुराण’ की विषय वस्तु में सूर्य की महिमा, उनके परम तेजस्वी स्वरूप, उनके परिवार, उनकी उपासना पद्धति, विविध व्रत-उपवास, उनको करने की विधि, सामुद्रिक शास्त्र, स्त्री-पुरुष के शारीरिक लक्षण, रत्नों एवं मणियों की परीक्षा का विधान, विभिन्न प्रकार के स्तोत्र, अनेक सप्रकार की औषधियों का वर्णन, वर्प विद्या का विशद् ज्ञान, विविध राजवंशों का उल्लेख, विविध भारतीय संस्कार, तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा-प्रणाली तथा वास्तु शिल्प आदि शामिल हैं जिन पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है।

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भविष्य पुराण की भविष्यवाणियाँ

Bhavisya puran का पुराण वांगमय में एक विशिष्ट स्थान है। यह पुराण आज के सन्दर्भ में बहुत ही जीवनोपयोगी है। वर्तमान में जो भविष्य पुराण उपलब्ध है उसमें केवल 28 हजार श्लोक प्राप्त होते हैं। व्यास जी की दृष्टि इतनी दिव्य थी कि वे भविष्य में घटित होने वाले सारे रहस्यों को उन्होंनें पहले ही इस पुराण में लिपि बद्ध कर लिया। इस पुराण में नन्दवंश, मौर्य वंश, बाबर, हुमायँू, तैमूर, शिवाजी, महादजी सिन्धिया आदि का भी वर्णन व्यास जी ने पहले ही इस पुराण में कर दिया। इस पुराण में महारानी विक्टोरिया की 1857 में भारत साम्राज्ञी बनने का भी वर्णन है। तथा यह भी बताया गया है कि अंग्रेजी यहाँ की प्रमुख भाषा हो जायेगी और संस्कृत प्रायः लुप्त हो जायेगी।
रविवारे च सण्डे च फाल्गुनी चैव फरवरी।
षष्टीश्च सिस्कटी ज्ञेया तदुदाहार वृद्धिश्म्।।

भविष्य पुराण हिंदी में- bhavisya puran in hindi
                   Bhavisya puran in hindi

इस पुराण में भारतीय संस्कार, तत्कालीन सामाजिक व्यवस्था, शिक्षा प्रणाली पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है। वस्तुतः भविष्य पुराण सौर प्रधान ग्रन्थ है। सूर्योपासना एवं उसके महत्व का जैसा वर्णन भविष्य पुराण में आता है वैसा कहीं नहीं है। पंच देवों में परिगणित सूर्य की महिमा, उनके स्वरूप, परिवार, उपासना पद्धति आदि का बहुत विचित्र वर्णन है। पुराण की कथा सुनने एवं सुनाने वाले को भी महाफल की प्राप्ति होती है।

भविष्य पुराण कथा

एक बार कुमार कार्तिकेय भगवान सूर्य के दर्शन के लिये गये। उन्होंनें बड़ी श्रद्धा से उनकी पूजा की। फिर भगवान सूर्य की आज्ञा से वे वहीं बैठ गये। थोड़ी देर बाद उन्होंनें दो ऐसे दृश्य देखे जिनसे उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंनें देखा कि एक दिव्य विमान से कोई पुरूष आया। उसे देखते ही भगवान सूर्य खड़े हो गये, फिर उसके अंग को स्पर्श करके उसका सिर संूंघ कर उन्होंनें अपने भक्त वत्सलता प्रकट की एवं मीटी-मीटी बातें करते हुये उन्हें अपने पास बैठा लिया।

ठीक उसी समय दूसरा विमान आया, उससे उतर कर जो व्यक्ति भगवान सूर्य के पास आया उसकी भी भगवान सूर्य ने उसी प्रकार से उसका भी सम्मान करते हुये अपने पास बैठा लिया। जिनकी वन्दना स्वयं भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश किया करते हैं, उन भगवान सूर्य ने दो साधारण व्यक्तियों का इतना सत्कार क्यों किया यही कार्तिकेय कुमार के लिये आश्चर्य का विषय था। कुमार ने अपना आश्चर्य भगवान सूर्य के सामने रखते हुये पूछा, भगवन्, इन दोनों सज्जनों ने ऐसा कौन-सा सत्कर्म किया जो आप इन्हें सम्मान दे रहे हैं।

भगवान सूर्य बोले, ये सज्जन जो पहले आये, अयोध्या में इतिहास पुराण की कथा कहा करते थे। कथा सुनाने वाले मुझे बड़े प्रिय लगते हैं। यम, यमे, शनि, मनु, तप्ति मुझे इतने प्रिय नहीं लगते जितने कि कथा वाचक। मुझे धूप, दीप आदि से भी पूजा करने में इतनी खुशी नहीं होती जितनी की कथा सुनाने से होती है। ये सज्जन कथा वाचक हैं। इसलिये मैं इन पर इतना प्रसन्न हूँ।
भगवान सूर्य ने आगे कहा कि ये सज्जन जो बाद में मेरे पास आये, उन्होंनें बड़ी श्रद्धा से अनेकों पुराणों की कथा करवायी एवं सुनी।

एक बार कथा समाप्त होने पर इन्होंनें कथावाचक की प्रदक्षिणा की और उन्हें सोना दान में दिया। इन्होंनें कथावाचक का सम्मान करते हुये श्रद्धापूर्वक कथा सुनी, इसलिये मेरी प्रीति इन पर बहुत बढ़ गयी। इस प्रकार इतिहास पुराण की कथा सुनना एवं सुनाना पुराण और पुराण वक्ता की पूजा करना भगवान को सबसे अधिक प्रिय है।

इस पावन पुराण में श्रवण करने योग्य बहुत ही अद्भूत कथायें, वेदों एवं पुराणों की उत्पत्ति, काल-गणना, युगों का विभाजन, सोलह-संस्कार, गायत्री जाप का महत्व, गुरूमहिमा, यज्ञ कुण्डों का वर्णन, मन्दिर निर्माण आदि विषयों का विस्तार से वर्णन है।

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