Akbar ki kahani-अंधों की संख्या | akbar birbal ki kahani

Akbar ki kahani-अंधों की संख्या | akbar birbal ki kahani

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 Akbar ki kahani 

एक दिन अकबर और बीरबल बगीचे में यूं ही टहल रहे थे।

अकबर ने बीरबल से प्रश्न किया, बीरबल जरा बताओ इस दुनिया में अंधों की संख्या अधिक है या देख सकने वाले लोगों की संख्या अधिक है?बीरबल ने महाराज के प्रश्नों को सुना और महाराज से कुछ समय देने की गुजारिश की।और वहां से जाने लगे, जाते-जाते बीरबल ने कहा महाराज जहां तक आंधो की संख्या ही ज्यादा है।बीरबल की यह बात सुनकर अकबर आश्चर्यचकित रह गये। उन्होंने बीरबल से इस उत्तर का स्पष्टीकरण मांगा।

जवाब के स्पष्टीकरण के लिए अगले दिन बीरबल बाजार के बीच में एक बिना बुनी हुई चारपाई लेकर बैठ गए। और वे उस चारपाई को बुनने लगे।बीरबल ने अपने साथ दो आदमी भी ला रखे थे। जिनके हाथ में कागज और कलम था। देखते ही देखते वहां भीड़ इकट्ठा हो गई।बीरबल को देख सभी के मन में उत्सुकता थी।

वहां इकट्ठा लोगों में से सभी ने बीरबल से एक ही सवाल पूछा,“ बीरबल आप यहां क्या कर रहे हैं।”

बस अब क्या था बीरबल के अगल-बगल बैठे दो आदमी ऐसे लोगों का नाम लिखने लगे। यह सारी जानकारी अकबर राजा तक पहुंची।

राजा भी तत्काल बाजार में पहुंचे। अकबर ने भी बीरबल से वही प्रश्न दोहराया।

इस पर बीरबल ने अकबर को कोई जवाब नहीं दिया।केवल उन्होंने आसपास बैठे दो आदमी जो नाम लिख रहे थे उन्हें इशारा किया कि महाराज का भी नाम लिखें।

तभी ही महाराज ने वह कागज छीन लिया। महाराज ने देखा कि पूरे कागज में केवल अंधों की ही सूची है। बीरबल ने कहा महाराज जैसा कि मैंने आपको कहा था की अंधों की संख्या देखने वालों से बहुत ज्यादा है।यह कागज उसका प्रमाण है। इनके साथ साथ आपने भी मुझे चारपाई बुनते हुए देखा। परंतु आपने भी अंधों की भांति मुझे पूछा कि मैं क्या कर रहा हूं।

इसीलिए महाराज मैंने कहा था कि अंधो की संख्या अधिक है।बीरबल की चतुराई को देख महाराज मन ही मन मुस्कुरा रहे थे।

 

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