Akbar birbal hindi kahani-कवि और धनवान

Akbar birbal hindi kahani-कवि और धनवान

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Aaj hum apke liye laye hai akbar birbal hindi kahani jo darsati hai ki birbal itne chalak the ki veh apni chaturai se sabko nyay dilate the. Usi prakar unhono ek kavi ko nyaye diya tha.

कवि और धनवान 
बीरबल को केवल अकबर राजा ही नहीं बल्कि पूरी प्रजा भी सम्मान करती थी। उनके सम्मान का कारण था उनकी तेज बुद्धि और लोगों के प्रति प्रेम भावना। एक दिन एक कवि ने शहर के एक धनी आदमी को कविता सुनाई। कवि अपने पूरे अनमोल कविताएं उस धनी आदमी को सुना रहा था। कवि के मन में यह विचार चल रहा था कि यह सारे कविताएं सुनकर धनी आदमी उस कवि को जरूर इनाम देगा। परंतु पूरी कविता समाप्त होने के बाद धनी आदमी ने उसे इनाम ना देते हुए अगले दिन आने को कहा।

इस पर भी कभी निराश नहीं हुआ। कवि को यह लग रहा था की धनी आदमी ने अगले दिन जरूर इनाम देने के लिए ही बुलाया होगा।

अगले दिन सुबह की सूरज निकलते ही कवि उस धनवान के घर पहुंच गया। धनवान ने उसका स्वागत किया और मुस्कुराते हुए बोला महाशय कल जैसे आप मुझे कविता सुना कर खुश थे वैसे ही मैं आज आपको बुला कर खुश हूं। आपने भी कल मुझे कुछ नहीं दिया था इसलिए मैं भी आज आपको कुछ नहीं दूंगा।

कवि समझ गया कि यह धनवान व्यक्ति बड़ा ही कंजूस है। कवि वहां से निराश होकर निकल गया। वहां से निकलकर कभी नहीं यह सारी आपबीती अपने एक मित्र को बताई।कवि के मित्र ने तुरंत यह बात बीरबल को साझा की। बीरबल ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए कहां जैसा मैं कहता हूं वैसा करों। बीरबल ने कवि के मित्र को धनवान व्यक्ति से मित्रता करने को कहा और एक दिन भोजन के लिए अपने घर पर आमंत्रित करने को कहा। कवि के मित्र ने ठीक वैसा ही किया उसने उस धनवान व्यक्ति तथा कवि और इनके साथ ही बीरबल को भी आमंत्रित किया।

कुछ दिनों बाद आमंत्रण के अनुसार वह धनवान व्यक्ति वहां उपस्थित हो गया। खाने का समय गुजर जाने पर भी खाना नहीं आने पर धनवान व्यक्ति गुस्से से बौखला गया।
धनवान व्यक्ति बोल पड़ा खाने का समय तो हो गया है परंतु अभी तक खाना क्यों नहीं आया।
इस पर बीरबल बोल पड़े खाना,कौन सा खाना?
धनवान यह सुनकर गुस्से से और जलजला गया इस पर बीरबल बोले आपको भोजन पर निमंत्रण सिर्फ खुश करने के लिए किया गया था। धनवान यह सुनते ही और गुस्से में आ गया और कहने लगा मेरे साथ तुमने धोखा किया है। किसी इज्जत दार आदमी को घर बुलाकर ऐसा अपमान। यह तुमने बिल्कुल भी ठीक नहीं किया।

बीरबल धनवान के मुंह से जो चीज बुलवाना चाहते थे वह चीज धनवान ने बोल दिया। इस पर बीरबल मंद मंद मुस्कुराए और कहने लगे कि तुमने जब यही चीज वह कवि के साथ की तो सोचो उसे कितना ठेस लगा होगा। तुम्हारे पास तो धन की कमी नहीं परंतु तुम इस गरीब कवि को उसका इनाम देने से हिचकीचा रहे थे।धनवान को अपनी गलती समझ आई और उसने सा सम्मान इनाम कवि को भेंट में दिया।

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